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सरपंच से वापस हो सकता है वित्तीय अधिकार, हाईकोर्ट में लगी याचिका पर फैसला, रिश्वत वाला कनेक्शन, जानें पूरा मामला

 

MP हाईकोर्ट ने एक सरपंच की वित्तीय अधिकार वापस लेने वाली याचिका खारिज कर दी। उसने सीईओ के फैसले को चुनौती दी थी। लोकायुक्त में रिश्वत का मामला दर्ज होने के कारण कोर्ट ने सीईओ के फैसले को सही ठहराया।

 26 May 2025, 11:04 am

जबलपुर: हाईकोर्ट ने एक सरपंच की याचिका को खारिज कर दिया है। सरपंच ने जिला पंचायत के सीईओ द्वारा वित्तीय अधिकार वापस लेने के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि सरपंच के खिलाफ लोकायुक्त में रिश्वत लेने का मामला दर्ज है। इसलिए कोर्ट ने सीईओ के फैसले को सही ठहराया और याचिका रद्द कर दी। इससे होगा ये कि सरपंच अब पंचायत के वित्तीय फैसले नहीं ले पाएंगे।
मामला शहडोल जिले के सोहागपुर तहसील के मायकी ग्राम पंचायत का है। मंघु बैगा नाम के सरपंच ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि जिला पंचायत के सीईओ ने उनसे वित्तीय अधिकार छीन लिए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोकायुक्त ने उनके खिलाफ 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया था।
भ्रष्टाचारी सरपंच का कहना
सरपंच ने अपनी याचिका में कहा था कि सीईओ को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। उनके वकील ने कहा कि सिर्फ आपराधिक मामला दर्ज होने से किसी सरपंच के वित्तीय अधिकार नहीं छीने जा सकते। उन्होंने यह भी कहा कि सीईओ ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह आदेश जारी किया है। सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि सरपंच पर भ्रष्टाचार और अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप है। इसलिए वित्तीय अधिकार वापस लेना सही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में शामिल होने के कारण यह फैसला लिया गया।
सीईओ के पास ये पावर
एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने मध्य प्रदेश पंचायत (मुख्य कार्यपालन अधिकारी की शक्तियां एवं कार्य) नियम 1995 का हवाला दिया। इस नियम के अनुसार, सीईओ को पंचायत की सभी गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें नियंत्रित करने का अधिकार है।


कोर्ट का एक्शन
कोर्ट ने कहा कि सीईओ का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि पंचायत के धन या संपत्ति का कोई नुकसान न हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीईओ को भ्रष्टाचार के मामले में शामिल पाए जाने वाले सरपंच की वित्तीय शक्तियों को वापस लेने का अधिकार है।

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